BIRTH RITU ETC. The strongest of the planets in the Prashna Lagna indicates the Ritu (season) at birth. Should there be none in the Ascendant, the Lord of the ascendant decanate is the ruler of Ritu at birth. Should there be a clash in the Ayana and Ritu arrived at, the Ritu Lords arrived should be interchanged thus: the Moon for Venus, Mercury for Mars and Jupiter for Saturn. The respective month of the Ritu is decided depending on the first, or second half of the decanate being Ascendant. The degrees elapsed in the decanate will be to the knowledge of the natal Tithi. Some say, that this will lead to locating the natal Sun.
प्रदन लग्न में जो ग्रह हो उस ग्रह की ऋतु में जन्म समझना चाहिये । यथा-- यदि प्रश्न लग्न में सूर्य हो तो ग्रीष्म ऋतु, चन्द्रमा हो ता वर्षा, मङ्गल हा तो ग्रीष्म ऋतु, बुध हो तो शरद ऋतु, गुरु हो तो हेमन्त, शुक्र हो तो बसन्त और शनि हो तो गिशिर ऋतु समझना चाहिये । यदि अधिक ग्रह हों तो जो सबसे बली हो उसकी ऋतू समझनी चाहिये । यदि लग्न में कोई ग्रह न हो तो प्रश्न कालिक लग्न में द्रेष्काण राशि स्वामी ग्रह की ऋतु कहनी चाहिये । यदि अयन और ऋतु में भेद हो जैसे लग्न का पूर्वार्द्ध होने से उत्तरायण की प्राप्ति और लग्न में चन्द्रमा होने से वर्षा ऋतु होती है इसलिए भेद होता हैं क्योंकि उत्तरायण में वर्षा ऋतु नहीं होती है । यह असम्भव हे । अतः परस्पर परिवर्तत से ऋतु क ज्ञान करता चाहिये । अथवा यदि अयन व ऋतु में मेद हो तो चन्द्रमा, त्रुध, गुरु को क्रम से शुक्र, मङ्गल शनि के साथ परस्पर परिवर्तन ळर ऋतु का ज्ञान करना चाहिये । यदि द्रेष्काण का पूर्वा हो तो ऋतु का पूर्वमास, उत्तराधं हो तो ऋतु का दुसरा मास जन्म का मास होता है क्योंकि १ ऋतु में दो माम होते हैं
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