If, at a birth, a planet be in its depression and if the lord of the sign of depression or that of the planet's exaltation Rasi be in a Kendra position with respect to the Moon's place or the Lagna, the person born will be a King and a just ruler.
नीचभंग राजयोग — जन्म कुण्डली में किसी ग्रह का नीच राशि में स्थित होना खराब योग माना गया है। किन्तु कभी-कभी ग्रह नीच राशि में स्थित होकर भी बहुत उत्तम प्रभाव दिखाते हैं अर्थात् उनके नीच होने का जो दोष है वह भंग हो जाता है — और वह फायदेमन्द साबित होते हैं। ऐसा कब होता है? यह नीचे के पाँच श्लोकों में बताया गया है। यदि किसी के जन्म के समय कोई ग्रह नीच राशि में पड़ा हो और (क) इस नीच राशि का स्वामी चन्द्रमा से केन्द्र में हो और (ख) जो ग्रह नीच है उसका उच्चनाथ भी चन्द्रमा से केन्द्र में हो — तो नीच भंग हो जाता है, बल्कि उत्तम राज योग बनाता है। यह समस्त एक योग है। 'उच्चनाथ' शब्द का क्या अर्थ? इसके अर्थ में मतभेद है। मान लीजिये शनि मेष राशि का नीच का है। इसका उच्चनाथ कौन हुआ? एक मत तो यह कि शनि तुला राशि का उच्च का होता है और तुला का स्वामी शुक्र होता है, इस कारण उच्चनाथ शुक्र हुआ। दूसरा मत यह है कि शनि मेष राशि में है और मेष में सूर्य उच्च का होता है, इस कारण उच्चनाथ सूर्य हुआ। हमारे विचार से पहला अर्थ विशेष उपयुक्त है। सूर्य का उच्चनाथ मंगल, चन्द्रमा का उच्चनाथ शुक्र, बुध का उच्चनाथ बुध, बृहस्पति का उच्चनाथ चन्द्रमा, शुक्र का उच्चनाथ बृहस्पति और शनि का उच्चनाथ शुक्र जैसा ऊपर समझाया गया है। ऊपर नीचभंग होने के लिये (क) और (ख) दो शर्तें बताई गई हैं। जब दोनों ही पूरी होंगी तब ही नीच भंग होगा। अब नीच भंग का एक अन्य योग बताते हैं।
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