यदि प्रशनकालिक लग्न में चन्द्रमा या मंगल हो और शनेहचर उसे देखता ं स्थान हो, अथवा प्रशनकालिक लग्न में सूर्य होऔर उससे सातवें या आठवे पके नेनमनकत* / मै कान “>क७)७-न.ब+न+क+७५ कक क<-0ह:२......:.४.२-+-२++०-२.े+-क--_..>+>बकैके>---से लकनान«० ब क िक #९कक अब केबेन परेड इ९७-कमक-+-< की का कि > &3-;कलकीनवीकलनलकील कक <परम थ; 2६८--८३० वेब ++....---+२२+केके..>-८-3०--नन_ +>+++२०००० >> >>... 3ं७-->क>>>अक में चन्द्रमा हो, अथवा प्रइनलग्न में या उससे चौथे, आठवें, सातवें स्थानों में पापग्रह हो तो यात्रा करनेवाले का नाश या पराजय होता है ॥| ५॥। प्रश्नद्वारा यात्रा कीदिशा का निर्णय त्रिकोणे कुजात्सोरिशुक्रज्ञजावा यदेको5पि वा नो गमोकर्काच्छशी वा । बलीयांस्तु मध्ये तयोयों ग्रहः स्थाव्स्वकीयां दिद्व प्रत्युतासों नयेच्च ॥। ६ ॥
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