Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 11 · · Verse 31
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः--गोस्त्रीझषे पूर्णा घाततिथि: (स्यात) तु (तथा ) नृयुक्क॒कंटके भद्रा घाततिथिः:, अथ कौपप्याजयो: नन्‍्दा, नक्रधटे रिक्‍्ता, धनु: कुम्भहरो जया घाततिथि: (ता: ) न शस्ता: (स्यू:) ॥ ३० ॥। वृष, कन्‍्या और मीन राशिवाले को पञ्चमी, दशमी; पूर्णमासी, अमावास्या ये तिथियाँ घातक हैं । मिथुन और कक राशिवाले को द्वितीया, सप्तमी और द्वादशी घातक हैं। वृश्चिक और मेष राशिवाले को परीवा, छठि और एकादशी । मकर और तुला राशिवाले को चौथि नवमी और ५ वतन कि 2«0 9 यात्राप्रकरण १७९ चतुददंशी । धनु, कुम्भ और सिह राशिवाले को तृतीया, अष्टमी और त्रयोदशी ये तिथियाँ घातक हैं ।इस कारण यात्रा आदि में वजित हैं ।| ३० ॥। घाततिथि चक्र है वगाक्माक्गाक्लगत रह शनि ि राशि “कू+कीए कस एडऔक ए >प 7 है «हूं के ४ है के <क के आह १३१५४ हैक हे 755के किटहै प्‌ दे के पक | परे | पृ या: ० १० १३ १४ + लिय घात घातक वार नक्र भोमो गोहरिस्त्रोषु मन्दरचन्द्रो हन्द्रेष्कोजरभ ज्ञरच कक । शुक्र: कोदण्डालिमीनेषु कुम्भजके जीवो घातवारा न दास्ताः ॥ ३१॥

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