दशचन्त्ये नवांदे द्विगुणे शिवाग्नौ शुक्र: कुनागे द्विनगेग्निरूपे । बेदाउम्बरे पत्चनिधों गजेषों नन्देशयोर्भानुरसे शिवाग्नों ॥ ३॥ ऋमाच्छुभो विद्ध इति ग्रहः स्यात्पितुः सुतस्यात्र न वेधमाहुः । अन्वयः--द्विगुणे, शिवाग्नों (तथा) देवगुरु: शराब्धौ, द्वचन्त्ये, नवांशे, द्विगुणे, शिवाग्नों। (तथा) शुक्र: कुनागे, दनंगे, अग्निरूपे, वेदाम्बरे, पञ्चनिधों, गजेषो, नन्देशयोः, भान्रसे, शिवाग्नौ, इति (एवं) क्रमात् ग्रह: शुभ: स्यात् विद्धः स्थात् । अन्न पितु: सुतस्य बेध॑ न आहुः ॥ १०३ ॥। जन्मराशि से पाँचवें स्थान में स्थित ब्रृहस्पति शुभ और यदि चौथे स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध हो जाता है ॥ २ ॥ ऐसे ही दूसरे स्थान में स्थित बृहस्पति शुभ और यदि बारहवें स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध हो जाता है। ऐसे ही नवें स्थान में स्थित बृहस्पति शुभ और यदि दशरवें स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध हो जाता है । ऐसे ही दूसरे स्थान में स्थित बृहस्पति शुभ और यदि तीसरे स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध हो जाता है । ऐसे ही गेरहवें स्थान में स्थित बृहस्पति शुभ और यदि तीसरे स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध हो जाता है। जन्मराशि से पहिले स्थान में स्थित शुक्र शुभ और यदि आठवें स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध होजाता है। ऐसे ही दूसरे स्थान में स्थित शुक्र शुभ और यदि सातवें स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध हो जाता है। ऐसे ही तीसरे स्थान में स्थित शुक्र शुभ और यदि पहिले स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध होजाता है। ऐसे ही चौथे स्थान में स्थित शुक्र शुभ और यदि दशवें स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध हो जाता है। ऐसे ही पाँचवें स्थान में स्थित शुक्र शुभ और यदि नवें स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध हो जाता है। ऐसे ही आठवें स्थान में स्थित शुक्र शुभ और यदि पाँचवें स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध होजाता है। ऐसे ही नवें स्थान में स्थित शुक्र शुभ और यदि गेरहवें स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध हो जाता है। ऐसे ही बारहवें स्थान में स्थित शुक्र शुभ और यदि छढे स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध हो जाता है। ऐसे ही गेरहंबें स्थान में स्थित शुक्र शुभ और यदि तीसरे स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध हो जाता है ॥ ३॥
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