Antagonism with kinsmen, mental agony, quarrels, loss of position, losses in ventures, loss of wealth as a result of imposition of fines or penalties by government, imprisonment, distress to wife and son, will be the results if Jupiter be weak and be in the 6th, the 8th or the 12th from the lord of the Dasa (Saturn).
दायेशात्षष्ठरन्प्र वा व्यये वा बलवर्जिते । बन्धुदरेषो मनो दुःखं कलहः पदविच्युतिः ।।78।। कुभोजनं कर्महानी राजदण्डादधनव्ययः । कारागृहग्रवेशश्च पुत्रदारादिषीडनम् ।।79।। द्वितीयद्यूननाथे तु देहबाधा मनोरुजः । आत्मसम्बन्धिमरणं भविष्यति न संशयः ।।80।। तददोषपरिहारार्थ शिवसाहस्रकं जपेत् । स्वर्णदानं प्रकूर्वीत द्यारोग्यं भवति धुवम् ।।81।। यदि दशापति से 6.8.12 मे गुरु हो या निर्बल हो तो बन्धुओं से द्वेष, मन मेँ दुःख, कलह, पदहानि, कुमोजन, कार्य मँ असफलता, राजदण्ड से धनहानि, कारावास, पुत्र, स्त्री को पीडा होती है । यदि बृहस्पति 2.7 मावेश हो तो शरीर कष्ट, मानसिक कष्ट, अपने किसी व्यक्ति की हानि होती है। इस दोष को दूर करने के लिए शिव सहस्रनाम का जप व स्वर्णं दान करना चाहिए, तब आरोग्य होता हे ।
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