There will be physical distress, if Rahu be associated with the lord of the 2nd or the 7th. The remedial measures to obtain relief from the above evil effects are Mrityunjaya Japa and giving a goat in charity.
गुरु अन्तर्दशा फल :- मन्दस्यान्तर्गते जीवे केन्द्रे लाभत्रिकोणगे । लग्नाधिपेन संयुक्ते स्वोच्चे स्वक्षेत्रगेऽपि वा ।।70।। सर्वकायर्थिसिदिधः स्याच्छोभनं भवति धुवम् । महाराजग्रसादेन धनवाहनभूषणम् ।।71।। सम्मानं प्रभुसम्मानं प्रियवस्त्रार्थलाभकूत् । देवतागुरुभक्तिश्च विद्वज्जन समागमः ।।72।। दारपुत्रादि लाभश्च पुत्रकल्याणवैभवम् । शनि दशा में गुरु का अन्तर हो तथा गुरु केन्द्र. त्रिकोण, लाम स्थान मे, स्वोच्च, स्वक्षेत्र मेँ हो या शुम भावं मे लग्नेश से युक्त होतो सब कार्यो मे सफलता, शुभफल, बडे लोगों के सहयोग से धन व वाहनं की प्राप्ति, सम्मान, अधिकारी या राजा से प्रशंसा, प्रिय भोग्य वस्तुओं कौ प्राप्ति, देवताओं व गुरु के प्रति भक्ति, विद्वानों कं साथ समागम, स्त्रीव पुत्रादि का लाम, पुत्र की उन्नति व वैभव होता हे ।
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