There will be loss of wealth, danger of wounds, danger from thieves, snakes, weapons, gout and other similar diseases, distress to father and brothers, quarrels with co-partners, loss of kinsmen, coarse food, going away to foreign lands, unnecessary expenditure, etc., if Mars be in his sign of debilitation or combust, or be in the 8th or the 12th from the Ascendant and be associated with or aspected by malefics.
नीचे चास्तंगते भौमे लग्नादष्टव्ययस्थिते । पाप दष्टयुते चापि धनहानिर्भविष्यति ।।57।। चौरादिव्रणशस्त्रादिग्रन्थिरोगादिपीढनम् भातपित्रादिपीडा च दायादजनविग्रहः ।।58।। चतुष्पाज्जीवहानिश्च कुत्सितान्नस्य भोजनम् । विदेशगमनं चैव नानामार्गे धनव्ययः ।।59।। अष्टमद्यूननाथे तु दितीयस्थेऽथवा यदि । अपमृत्युभयं चैव नानाकष्टं पराभवः ।।60।। तद्दोषपरिहारार्थं शान्ति होमं च कारयेत् । वृषदानं प्रकुर्वीत सर्वारिष्टनिवारणम् ।।61।। यदि मंगल नीचगत, अस्तंगत या अष्टमस्थ पापदृष्टयुक्त हो तो धनहानि होती है । चोर मय, सर्पमय, व्रण (घाव) मय शस्त्रादि मय, शरीर 1, दयूमर आदि से पीड़ा, भाइयां व मित्रां को कष्ट, सम्पत्ति कं दावेदारां से विवाद, चौपाया पशु से कष्ट या हानि, कुमोजन, विदेशगमन, अनेक प्रकार से.धन का व्यय होता है। यदि 7.8 भावेश मंगल हो या मंगल दितीयस्थ हो तो अपमृत्युमय, नाना प्रकार से कष्ट, पराजय होती है । इस दोष की शान्ति के लिए शान्तिकार्य, हवन, सोँड दान करना चाहिए, तब कष्ट दूर होता हे ।
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