Bṛhat Parāśara Horā Śāstra
Chapter 57 · atha śanyantardaśāphalādhyāyaḥ · अथ शन्यन्तर्दशाफलाध्यायः · Verse 51
Sanskrit · DevanāgarīBṛhat Parāśara Horā Śāstra manuscript tradition
मित्रप्रभुवशादिष्टं सर्वसौख्यं शुभावहम् ।
दायेशाद्द्वादश भावे रन्ध्रे वा बलवर्जिते
IAST Transliteration
mitraprabhuvaśādiṣṭaṃ sarvasaukhyaṃ śubhāvaham | dāyeśāddvādaśa bhāve randhre vā balavarjite
TranslationsTwo-source verified
English

Effects like sleepiness, lethargy, loss of position, loss of enjoyments, increase in the number of enemies, antagonism with kinsmen, will be experienced, if the Moon be weak and be in the 6th, the 8th or the 12th from the lord of the Dasa (Saturn).

Hindi

दायेशात्केन्द्रराशिस्थे त्रिकोणे लाभगेऽपि वा ।।48।। वाहनाम्बर पश्वादि ्रात्वदिधः सुखावहा । पित॒मातसुखावाप्तिः स्त्रीसौख्यं च धनागमः ।।49।। मित्रप्रभुवशादिष्टं सर्वसौख्यं शुभावहम्‌ । दायेशाद द्वादशे भावे रन्धे वा बलवज्जिति ।।50।। शयनं रोगमालस्यं स्थानभ्रष्टं सुखावहम्‌ । शरुवृदिध विरोधश्च बन्धुद्ेषमवाप्नुयात्‌ ।।51।। द्वितीयद्यूननाथे तु देहालस्यं भविष्यति । तददोषशमनार्थं च तिल होमं समाचरेत्‌ ।।52।। गुडं धृतं च दध्नाक्तं तण्डुलं च यथाविधि । श्वेतां गां महिषीं दद्यादायुरारोग्यवृदधये ।।53।। (4) महादशेश से केन्द्र, त्रिकोण या लाम स्थान मेँ चन्द्रमा हो तो वाहन, पशु, वस्त्रादि की प्राप्ति, माइयों की वृदिध, माता-पिता को सुख, स्त्री का सुख, धन लाम, मित्र या राजा के सहयोग से सब सुख मिलते है। (6) महादशेश से 8.12 मं यदि चन्द्रमा हो या निर्बल चन्द्रमाहोतो आलस्य, अधिक शयन, रोग, स्थान नाश होता हे । शत्रुओं की वृदिध, शत्र विरोध, भाई-बन्धुओं से द्वेष होता ह । (1) यदि चन्द्रमा 2.7 भावेश हो तो शरीर मं शिथिलता होती है| दोष शान्ति कं लिए तिल से हवन करे । गुड घी व दही चावल का दान करं तथा सफेद गाय या र्मेस का दान करें|

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse