Fulfilment of ambitions by the beneficence of the king, charities, performance of religious rites, creation of interest in the study of Shastras, composition of poems, interest in Vedanta etc., listening to Puranas, happiness from wife and children, will be experienced, if Venus be in the 9th, the 11th or kendra from the lord of the Dasa (Saturn).
दायेशाद व्ययगे शुक्रे षष्ठे वा हयष्टमऽपि वा ।।31।। नेत्रपीडा ज्व्रभयं स्वकुलाचारवर्जितः । कपोले दन्तशूलादि हदिगुह्ये च पीडनम् ।।32।। जलभीतिर्मनस्तापो वृक्षात्पतन सम्भवः । राजद्वारे मनदेषः सोदरेण निरोधनम् ।।33।। दितीयसप्तमाधीशे आत्मक्लेशो भविष्यति । तद्दोष परिहारार्थं दुगदिवीजपं चरेत् ।।34।। श्वेतां गां महिषी दद्यादायुरारोग्यवृदधये । जगदम्बा प्रसादेन ततः सुखमवाप्नुयात् ।।35।। यदि दशापति से 6.8.12 में शुक्र हो तो पीडा, ज्वरादि रोग, अपने कुलाचार सं हीन अर्थात् कुल के प्रतिकूल कार्य, कपोल या दत मँ दर्द, हृदय या गुप्तांगों मेँ पीड़ा, जल से मय, मन मे सन्ताप, वृक्ष से पतन, राजदार मेँ मन मेँ मलिनता, भाइयों से विरोध होता है। यदि शुक्र2.7 भावेश हो तो स्वयं को कष्ट होता हे । इस दोष की शान्ति कं लिए, दुर्गा पाठ, सफेद गौ या भस का दान करं । तब मगवती की कृपा से सुख, आयु व स्वास्थ्य की वृदिधि होती है ।
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