There will be physical distress if Mercury be the lord of the 2nd or the 7th. The remedial measures to obtain relief from the above evil effects and to regain enjoyment in life are recitation of Vishnu Sahasranam and giving grains in charity.
षष्ठाष्टमव्यये सौम्ये नीचे वास्तंगते सति । रव्यारफणिसंयुक्ते दायेशादवा तथैव च ।।12।। नृपाभिषेकम्थप्तिर्देशग्रामाधिपत्यकम् । फलमीदुशमादौ तु मध्यान्ते रोगपीडनम् ।।13।। नष्टानि सर्वकार्याणि व्याकुलत्वं महद्भयम् । दितीयसप्तमाधीशे देहबाधा भविष्यति ।।14।। तददोषपरिहारार्थं विष्णुसाहस्रकं जपेत् । अन्नदानं प्रकूर्वीत ततः सौख्यमवाप्नुयात् ।।15।। यदि बुघ 6.8.12 भाव मे, या नीचगत या अस्तंगत या सूर्य, मंगल, राहु कें साथ हो अथवा दशेश शनि से 6.8.12 में हो तो दशारम्म में पद प्राप्ति, धन लाम, स्थानीय अधिकार, मध्यमाग में रोग पीडा, सब कार्यो का नाश, मन मेँ व्याकुलता, मय होता है । यदि बुघ 2-7 भावेश हो तो शरीर कष्ट होता है । दोष शान्ति के लिए विष्णु सहस्रनाम का पाठ व अन्न दान करना चाहिए, तब सुख होता हे ।
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