There will be heart disease, defamation, quarrels, danger from enemies, foreign journeys, affliction with Gulma (enlargement of skin), unpalatable food and sorrows etc., if Saturn be in the 6th, the 8th or the 12th from the lord of the Dasa (Rahu). Premature death is likely if Saturn be lord of the 2nd or the 7th. Remedial measure to obtain relief from the above evil effects and to regain good health, is giving a black cow or she-buffalo in charity.
दवितीयद्यूननाथे तु ह्यपमृत्युर्भविष्यति ॥29॥ कृष्णां गां महिषीं दद्याद्दानेनारोग्यमादिशेत् । यदि शनि नीचगत, शत्रुक्षेत्री, 8, 12 भाव में स्थित हो तो नीच लोगों से डर, राजभय, शत्रुओं से भय, स्त्री पुत्रादि को पीडा, अपने बन्धुओं की ओर से मन मँ सन्ताप, दायादजन (हिस्सेदारों) से विवाद, मुकदमेबाजी, अचानक भूषण (आभूषण, पदवी, खिताब, उपनाम) प्राप्ति होती है । दशेश से 6, 8, 12 मेँ शनि हो या पापग्रह से युक्त हो तो इसकी अन्तर्दशा मे हृदयरोग, मानहानि, विवाद, शत्रुओं की ओर से कष्ट, अन्य देशों या प्रदेशों मेँ संचार अर्थात् वृथा भ्रमण या नियमित भ्रमण करना पडे, अपनी जाति पर आने वाले किसी कष्ट या विपदा का शिकार होने से कष्ट, गुल्म रोग (तिल्ली-जिगर बढना), अन्य किसी रोग से पीडा, कुभोजन, कोदों-ज्वार आदि साधारण अनाज का भोजन होता है । यदि शनि 2, 7 भावेश हो तो अपमृत्यु हो जाती है । इसकी शान्ति के लिए काली गाय या भैंस का दान करे, तब आरोग्य लाभ होता है ।
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