If Gulika is in the 10th, the native will be endowed with sons, be happy, will enjoy many things, be fond of worshipping gods and fire and will practise meditation and religion.
गुलिक का द्वादशभाव-फल: (1) लग्नस्थ गुलिक से रोग-पीडित, कामुक-स्वभाव, पापी-मन वाला, शठ, खल-स्वभाव, अति-दुःखी होता है। (2) द्वितीयस्थ गुलिक से विकार-युक्त, दुःखी, नीच, व्यसनों से पीडित, निर्लज्ज, दीन-हीन होता है। (3) तृतीयस्थ गुलिक से सुन्दर-शरीर वाला, पुण्य-कार्य करने वाला, सज्जनों का प्रेमी, राजपूज्य होता है। (4) चतुर्थस्थ गुलिक हो तो रोगी, सुख-हीन, पाप-कारी, वात व पित्त-विकार से युक्त होता है। (5) पञ्चमस्थ गुलिक हो तो कहीं भी प्रशंसा न पाने वाला, धन-हीन, अल्पायु, द्वेष-पूर्ण-स्वभाव वाला, नीच, नपुंसक, स्त्री से पराजित, नास्तिक होता है। (6) षष्ठस्थ गुलिक से शत्रुओं से रहित, पुष्ट-शरीर वाला, तेजस्वी, स्त्रियों द्वारा मान्य, उत्साही, दृढ-विचार वाला व हितकारी होता है। (7) सप्तमस्थ गुलिक से स्त्री से पराजित, पाप-कार्य करने वाला, स्त्री-गामी, पतला, मित्रता-रहित, स्त्री के धन से ही मौज करने वाला होता है। (8) अष्टमस्थ गुलिक हो तो भूख से पीडित, क्रूर-स्वभाव वाला, तीव्र-क्रोधी, अत्यधिक निर्दय, दीन-हीन व गुण-रहित होता है। (9) नवमस्थ गुलिक से बहुत क्लेश पाने वाला, पतले-शरीर वाला, दुष्टता-पूर्ण-कार्य करने वाला, निर्दय, मन्द-बुद्धि या आलसी, चुगलखोर, बाहर से अच्छा दिखने वाला होता है। (10) दशमस्थ गुलिक से सुखी, भोग भोगने वाला, देवता-अग्नि आदि की पूजा करने में रुचि रखने वाला, योग-धर्म, यम-नियमादि द्वारा मन व इन्द्रियों को प्रायः नियन्त्रित करने वाला होता है। (11) एकादशस्थ गुलिक से अच्छी-स्त्री पाने वाला, प्रजा का अध्यक्ष अर्थात् मुखिया, अपने बन्धुओं (बिरादरी) का भला करने वाला, नीचा-कद, सब तरह से अधिकार-सम्पन्न होता है। (12) व्ययस्थ गुलिक से नीच-कार्य करने वाला, अंग-हीन, दुर्भाग्यशाली, आलसी, नीच लोगों से प्रेम करने वाला होता है।
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