Bṛhat Parāśara Horā Śāstra
Chapter 25 · athā'prakāśagrahaphalādhyāyaḥ · अथाऽप्रकाशग्रहफलाध्यायः · Verse 46
Sanskrit · DevanāgarīBṛhat Parāśara Horā Śāstra manuscript tradition
तपस्वी व्रतचर्यासु निरतो विद्ययाऽधिकः ।
धर्मस्थे जायते चापे मानवो लोकविश्रुतः
IAST Transliteration
tapasvī vratacaryāsu nirato vidyayā'dhikaḥ | dharmasthe jāyate cāpe mānavo lokaviśrutaḥ
TranslationsTwo-source verified
English

If Cāpa is in the 9th, the native will perform penance, will take to religious observations, be highly learned, and be famous among men.

Hindi

इन्द्रचाप (चाप/धनुष/कार्मुक) का द्वादशभाव-फल: (1) लग्नस्थ इन्द्र-धनुष से मनुष्य धन-धान्य व सुवर्ण से युक्त, कृतज्ञ, सज्जनों द्वारा समर्थित, सब दोषों से रहित होता है। (2) द्वितीयस्थ इन्द्रचाप से प्रिय-भाषी, प्रगल्भ, धनी, विनीत, विद्यावान्‌, रूपवान्‌ व धर्म-पालन में तत्पर रहता है। (3) तृतीयस्थ इन्द्र-धनुष से कंजूस, अत्यधिक कलाओं का ज्ञाता, चोरी से प्रेम करने वाला, हीनांग व मित्रों से रहित होता है। (4) चतुर्थस्थ इन्द्र-धनुष से सुख, चतुष्पद-धन से युक्त, धन-धान्य वाला, राजा द्वारा सम्मानित, नीरोग होता है। (5) पञ्चमस्थ चाप से तेजस्वी, दूर की बात सोचने वाला, देव-भक्त, प्रिय-भाषी, सर्वत्र बढ़ोत्तरी पाने वाला होता है। (6) षष्ठस्थ चाप से शत्रु-हन्ता, अत्यधिक धोखेबाज, सुखी, प्रेमी-स्वभाव, पवित्र, सर्वत्र सफलता पाने वाला होता है। (7) सप्तमस्थ चाप से स्वामी या राजा, गुणवान्‌, शस्त्र-वेत्ता, धार्मिक, प्रिय होता है। (8) अष्टमस्थ चाप से दूसरों की नौकरी करने वाला, परस्त्री से प्रेम करने वाला, विकलांग होता है। (9) नवमस्थ चाप से तपस्वी, व्रती, विद्यावान्‌, लोक-प्रसिद्ध होता है। (10) दशमस्थ चाप से मनुष्य अनेक पुत्रों वाला, धनी, ऐश्वर्यशाली, चतुष्पद-धन से युक्त, प्रसिद्ध होता है। (11) एकादशस्थ इन्द्रचाप से सदैव लाभ पाने वाला, नीरोग, अधिक-क्रोधी, अच्छा-सलाहकार, स्त्री के गूढ-स्वभाव को जानने वाला, शस्त्र-विद्या में निष्णात होता है। (12) द्वादशस्थ चाप से दुष्ट, घमंडी, दुर्बुद्धि, निर्लज्ज, परस्त्री-प्रेमी, निर्धन होता है।

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse