Bṛhat Parāśara Horā Śāstra
Chapter 25 · athā'prakāśagrahaphalādhyāyaḥ · अथाऽप्रकाशग्रहफलाध्यायः · Verse 41
Sanskrit · DevanāgarīBṛhat Parāśara Horā Śāstra manuscript tradition
सुखी गोधनधान्याद्यै राजसन्मानपूजितः ।
कार्मुके सुखसंस्थे तु नीरोगो तनु जायते
IAST Transliteration
sukhī godhanadhānyādyai rājasanmānapūjitaḥ | kārmuke sukhasaṃsthe tu nīrogo tanu jāyate
TranslationsTwo-source verified
English

If Cāpa is in the 4th, the native will be happy, endowed with quadrupeds, wealth, grains etc., be honoured by the king and be devoid of sickness.

Hindi

इन्द्रचाप (चाप/धनुष/कार्मुक) का द्वादशभाव-फल: (1) लग्नस्थ इन्द्र-धनुष से मनुष्य धन-धान्य व सुवर्ण से युक्त, कृतज्ञ, सज्जनों द्वारा समर्थित, सब दोषों से रहित होता है। (2) द्वितीयस्थ इन्द्रचाप से प्रिय-भाषी, प्रगल्भ, धनी, विनीत, विद्यावान्‌, रूपवान्‌ व धर्म-पालन में तत्पर रहता है। (3) तृतीयस्थ इन्द्र-धनुष से कंजूस, अत्यधिक कलाओं का ज्ञाता, चोरी से प्रेम करने वाला, हीनांग व मित्रों से रहित होता है। (4) चतुर्थस्थ इन्द्र-धनुष से सुख, चतुष्पद-धन से युक्त, धन-धान्य वाला, राजा द्वारा सम्मानित, नीरोग होता है। (5) पञ्चमस्थ चाप से तेजस्वी, दूर की बात सोचने वाला, देव-भक्त, प्रिय-भाषी, सर्वत्र बढ़ोत्तरी पाने वाला होता है। (6) षष्ठस्थ चाप से शत्रु-हन्ता, अत्यधिक धोखेबाज, सुखी, प्रेमी-स्वभाव, पवित्र, सर्वत्र सफलता पाने वाला होता है। (7) सप्तमस्थ चाप से स्वामी या राजा, गुणवान्‌, शस्त्र-वेत्ता, धार्मिक, प्रिय होता है। (8) अष्टमस्थ चाप से दूसरों की नौकरी करने वाला, परस्त्री से प्रेम करने वाला, विकलांग होता है। (9) नवमस्थ चाप से तपस्वी, व्रती, विद्यावान्‌, लोक-प्रसिद्ध होता है। (10) दशमस्थ चाप से मनुष्य अनेक पुत्रों वाला, धनी, ऐश्वर्यशाली, चतुष्पद-धन से युक्त, प्रसिद्ध होता है। (11) एकादशस्थ इन्द्रचाप से सदैव लाभ पाने वाला, नीरोग, अधिक-क्रोधी, अच्छा-सलाहकार, स्त्री के गूढ-स्वभाव को जानने वाला, शस्त्र-विद्या में निष्णात होता है। (12) द्वादशस्थ चाप से दुष्ट, घमंडी, दुर्बुद्धि, निर्लज्ज, परस्त्री-प्रेमी, निर्धन होता है।

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