Bṛhat Parāśara Horā Śāstra
Chapter 25 · athā'prakāśagrahaphalādhyāyaḥ · अथाऽप्रकाशग्रहफलाध्यायः · Verse 2
Sanskrit · DevanāgarīBṛhat Parāśara Horā Śāstra manuscript tradition
शूरो विमलनेत्रांशः सुस्तब्धो निर्घृणः खलः ।
मूर्तिस्थे धूमसंज्ञे च गाढरोषो नरः सदा
IAST Transliteration
śūro vimalanetrāṃśaḥ sustabdho nirghṛṇaḥ khalaḥ | mūrtisthe dhūmasaṃjñe ca gāḍharoṣo naraḥ sadā
TranslationsTwo-source verified
English

EFFECTS OF DHŪMA IN VARIOUS BHĀVAS (upto śloka 13): If Dhūma is in the ascendant, the native will be valiant, endowed with beautiful eyes, stupefied in disposition, unkind, wicked and highly short-tempered.

Hindi

धूम का द्वादशभाव-फल: (1) लग्न में धूम हो तो मनुष्य शूरवीर, निर्मल आँखों वाला, अड़ियल, निर्दयी, खल, अति-क्रोधी होता है। (2) द्वितीयस्थ धूम से रोगी, धनी, हीनांग, राज्य-पक्ष की चिन्ता में मग्न रहने वाला, मन्द-बुद्धि, नपुंसक होता है। (3) तृतीयस्थ धूम से बुद्धिमान्‌, शूरवीर, उदार-मन, प्रिय-भाषी, धनी होता है। (4) चतुर्थस्थ धूम से स्त्री-शरीर के सुख से रहित, सदैव मन में दुःखी रहने वाला, सब शास्त्रों के अर्थों का विचारक (व्याख्याता या विचारक) होता है। (5) पञ्चमस्थ धूम से कम सन्तान, धन-हीन, मोटा या बड़प्पन मानने वाला, सब कुछ खा लेने वाला, मित्र व सलाहकारों से रहित होता है। (6) षष्ठस्थ धूम से शत्रु-नाशक, तेजस्वी, प्रसिद्ध व रोग-रहित होता है। (7) सप्तमस्थ धूम से निर्धन, कामुक, परस्त्री-गमन में कुशल, तेजो-हीन होता है। (8) अष्टमस्थ धूम से पराक्रम-रहित, उत्साही, सत्य के लिए संघर्ष करने वाला, अप्रिय, कठोर, स्वार्थी होता है। (9) नवमस्थ धूम से सुत व सौभाग्य से युक्त, धनी, सम्मानित, दयालु, धार्मिक व बन्धु-प्रेमी होता है। (10) दशमस्थ धूम से पुत्र व सौभाग्य से युक्त, सन्तोषी, बुद्धिमान्‌, सुखी, सत्य-वादी होता है। (11) एकादशस्थ धूम से धनी, धन-धान्य-युक्त, सोना आदि रखने वाला, रूपवान्‌, संगीतज्ञ या काव्यज्ञ, कला से युक्त, विनीत होता है। (12) द्वादशस्थ धूम से नीच, भ्रष्ट, पापी, परस्त्री-गामी, व्यसनी, निर्दय व धूर्त होता है।

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse