Bṛhat Parāśara Horā Śāstra
Chapter 25 · athā'prakāśagrahaphalādhyāyaḥ · अथाऽप्रकाशग्रहफलाध्यायः · Verse 19
Sanskrit · DevanāgarīBṛhat Parāśara Horā Śāstra manuscript tradition
शत्रुहन्ता सुपुष्टश्च सर्वास्त्राणां च चालकः ।
कलासु निपुणः शान्तः पाते शत्रुगते सति
IAST Transliteration
śatruhantā supuṣṭaśca sarvāstrāṇāṃ ca cālakaḥ | kalāsu nipuṇaḥ śāntaḥ pāte śatrugate sati
TranslationsTwo-source verified
English

If Vyatīpāta is in the 6th, the native will destroy his enemies, be physically mighty, skilful in use of all kinds of weapons and in arts, and be peaceful in disposition.

Hindi

व्यतीपात (पात) का द्वादशभाव-फल: (1) लग्नस्थ व्यतीपात से मनुष्य दुःखी, क्रूर, घातक-स्वभाव, मूर्ख, बन्धु-द्वेषी होता है। (2) द्वितीयस्थ पात से चालबाज, अधिक पित्त वाला, भोगी, निर्दय, अहसान न मानने वाला, दुष्ट-मन वाला, पाप-कार्य करने वाला होता है। (3) तृतीयस्थ पात से स्थिर-बुद्धि, युद्ध-वीर, दाता, धनी, राजा का प्रिय व सेनापति होता है। (4) चतुर्थस्थ पात से बन्धक व व्याधि से पीडित, पुत्र व भाग्य से रहित होता है। (5) पञ्चमस्थ पात से दरिद्र लेकिन सुन्दर, कफ-पित्त की अधिकता वाला, कठोर, निर्लज्ज होता है। (6) षष्ठस्थ पात से शत्रु-नाशक, बलवान्‌, सब शस्त्रों में कुशल, कला-निपुण, शान्त होता है। (7) सप्तमस्थ पात से धन-पुत्र व स्त्री से रहित, स्त्री से पराजित, दुःखी, कामुक, निर्लज्ज, शत्रुओं से मिल जाने वाला अर्थात्‌ गद्दार होता है। (8) अष्टमस्थ पात हो तो मनुष्य नेत्र-विकार वाला, दिखने में बदसूरत, दुर्भाग्यशाली, ब्राह्मणों की निन्दा करने वाला, रक्त-विकार से पीडित होता है। (9) नवमस्थ पात से अनेक व्यापार करने वाला, अनेक मित्रों वाला, बहुत अधिक विविध जानकारी रखने वाला, स्त्रियों का प्रिय व प्रिय-भाषी होता है। (10) दशमस्थ पात से श्रीमान्‌, शोभाशाली, धर्म-तत्त्व को जानने वाला, धर्म-कार्य में निपुण, बहुत बुद्धिमान्‌, विद्वान्‌ व तीव्र-बुद्धि होता है। (11) एकादशस्थ पात से खूब धनी, स्वाभिमानी, सत्य-वादी, पक्के-वचन वाला, घोड़े आदि वाहनों से युक्त, गीत-गान आदि में मन लगाने वाला होता है। (12) द्वादशस्थ पात से क्रोधी, बहुत अधिक कार्य करने वाला, विकलांग, धर्म-भ्रष्ट, अपने लोगों से द्वेष रखने वाला होता है।

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