Bṛhat Parāśara Horā Śāstra
Chapter 25 · athā'prakāśagrahaphalādhyāyaḥ · अथाऽप्रकाशग्रहफलाध्यायः · Verse 12
Sanskrit · DevanāgarīBṛhat Parāśara Horā Śāstra manuscript tradition
धनधान्यहिरण्याढ्यो रूपवांश्च कलान्वितः ।
धूमे लाभगते चैव विनीतो गीतकोविदः
IAST Transliteration
dhanadhānyahiraṇyāḍhyo rūpavāṃśca kalānvitaḥ | dhūme lābhagate caiva vinīto gītakovidaḥ
TranslationsTwo-source verified
English

If Dhūma is in the 11th, the native will be endowed with wealth, grains and gold, be beautiful, will have knowledge of arts, be modest and be skilful in singing.

Hindi

धूम का द्वादशभाव-फल: (1) लग्न में धूम हो तो मनुष्य शूरवीर, निर्मल आँखों वाला, अड़ियल, निर्दयी, खल, अति-क्रोधी होता है। (2) द्वितीयस्थ धूम से रोगी, धनी, हीनांग, राज्य-पक्ष की चिन्ता में मग्न रहने वाला, मन्द-बुद्धि, नपुंसक होता है। (3) तृतीयस्थ धूम से बुद्धिमान्‌, शूरवीर, उदार-मन, प्रिय-भाषी, धनी होता है। (4) चतुर्थस्थ धूम से स्त्री-शरीर के सुख से रहित, सदैव मन में दुःखी रहने वाला, सब शास्त्रों के अर्थों का विचारक (व्याख्याता या विचारक) होता है। (5) पञ्चमस्थ धूम से कम सन्तान, धन-हीन, मोटा या बड़प्पन मानने वाला, सब कुछ खा लेने वाला, मित्र व सलाहकारों से रहित होता है। (6) षष्ठस्थ धूम से शत्रु-नाशक, तेजस्वी, प्रसिद्ध व रोग-रहित होता है। (7) सप्तमस्थ धूम से निर्धन, कामुक, परस्त्री-गमन में कुशल, तेजो-हीन होता है। (8) अष्टमस्थ धूम से पराक्रम-रहित, उत्साही, सत्य के लिए संघर्ष करने वाला, अप्रिय, कठोर, स्वार्थी होता है। (9) नवमस्थ धूम से सुत व सौभाग्य से युक्त, धनी, सम्मानित, दयालु, धार्मिक व बन्धु-प्रेमी होता है। (10) दशमस्थ धूम से पुत्र व सौभाग्य से युक्त, सन्तोषी, बुद्धिमान्‌, सुखी, सत्य-वादी होता है। (11) एकादशस्थ धूम से धनी, धन-धान्य-युक्त, सोना आदि रखने वाला, रूपवान्‌, संगीतज्ञ या काव्यज्ञ, कला से युक्त, विनीत होता है। (12) द्वादशस्थ धूम से नीच, भ्रष्ट, पापी, परस्त्री-गामी, व्यसनी, निर्दय व धूर्त होता है।

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