The Sage said — Now I am going to describe to you the effects of Antardasas in the Kalachakra Dasa as related by Lord Shiva to the Goddess Parvati.
जगदिधताय प्रोक्तानि पुरा यानि पुरारिणा । तानि चक्रान्तर्दशाफलानि कथयाम्यहम् ।। 1 ।। भगवान् शंकर ने काल चक्रदशा की जो शिक्षा दी है, उस दशा प्रकार में अन्तर्दशा का फल अब मैं (पराशर) कहता हूँ । पहले काल चक्र दशा में अन्तर्दशा साधन कह चुके हैं । उदाहरण द्वारा विषय को स्पष्ट किया जा चुका है । पुनश्च 100.85.83.86 वर्ष मेषादि राशियों के अंशों में (काल चक्रांश) आयु वर्ष या सम्पूर्ण दशा वर्ष क्रमशः होते हैं । सिंह व धनु राशि से आगे 100.85.83.86 वर्षों की क्रमिक आवृत्ति होती है । जिस राशि के जो दशा वर्ष पीछे सव्य व अपसव्य चक्र में हैं, उन्हें परस्पर गुणा करके सम्पूर्ण दशा वर्षों से भाग देने पर अन्तर्दशा होती है ।
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