There is no doubt that observance of remedial measures in the form of prescribed religious rites destroy the evil effects of the inauspicious Dasas and yield happiness.
क्रूरग्रहदशाकाले शान्तिं कुर्याद् विधानतः । ततः शुभमवाप्नोति तद्दशायां न संशयः ।। 32 ।। यदि किसी ग्रह या राशि की दशा में अनिष्ट फल दिखता हो तो शास्त्रोक्त विधि से पूर्वोक्त दशान्तर्दशा फलाध्याय में बताई गई विधि से जप, दान, यज्ञ, पाठ आदि करना चाहिए । शान्ति विधान से उस दशा में निःसन्देह अशुभ फल निवृत्त हो जाता है । शान्ति विधान करने से शुभ फल की अवश्यम्भाविता बढे या न बढे, लेकिन अशुभ की निवृत्ति अवश्य होती है । शान्ति के विषय में पीछे ग्रहदशाध्याय में कहा गया है, विशेष शान्ति विधान आगे उत्तरखण्ड में बताया जाएगा ।
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