Bṛhat Parāśara Horā Śāstra
Chapter 65 · atha kālacakranavāṃśadaśāphalādhyāyaḥ · अथ कालचक्रनवांशदशाफलाध्यायः · Verse 3
Sanskrit · DevanāgarīBṛhat Parāśara Horā Śāstra manuscript tradition
अर्थलाभो भवेच्चापे मेषस्य नवभागके ।
फलमेवं विजानीयं दशाकाले द्विजोत्तम
IAST Transliteration
arthalābho bhaveccāpe meṣasya navabhāgake | phalamevaṃ vijānīyaṃ daśākāle dvijottama
Translations
Hindi

मेषे तु रक्तजा पीड़ा वृषभे धान्यवर्धनम्‌ । मिथुने ज्ञानवृदिधश्च कर्के धनपतिभवेत्‌ ।। 1 ।। सिंहभे शत्रुबाधा स्यात्‌ कन्यायां स्त्रीजनात्‌ सुखम्‌ । तुलभे राजमन्त्रित्वं वृश्चिके मृत्युतो भयम्‌ ।। 2 ।। अर्थलाभो भवेच्चापे मेषस्य नवभागके । फलमेवं विजानीयाद्‌ दशाकाले द्विजोत्तम ! ।। 3 ।। मेषांश में जन्म हो तो मेष की दशा में रक्त विकार, वृष दशा में धान्य वृदिध, मिथुन दशा में ज्ञान-विद्यादि या अनुभव की वृदिध, कर्क दशा में धनाढ्यता होती है । सिंह दशा में शत्रु बाधा, कन्या दशा में स्त्री वर्ग से सुख, तुला दशा में राजमन्त्रिता, वृश्चिक दशा में मरण भय, धनु दशा में धन लाभ होता है । इस तरह काल चक्र दशा का फल जन्मकालीन काल चक्रांश द्वारा भी देखना चाहिए ।

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