Effects like loss of wealth by the wrath of the king, imprisonment, diseases, loss of physical strength, antagonism with father and brother and mental agony, will be experienced if Ketu be in the 6th, the 8th or the 12th from the lord of the Dasa or be associated with malefics.
केतु अन्तर्दशा फल :- जीवस्यान्तगति केतौ शुभग्रहसमन्विते । अल्पसौख्यधनावाप्तिः कुत्सितान्नस्य भोजनम् ।।32।। परान्नं चैव श्रादधान्नं पापमूलाद धनानि च । बृहस्पति कौ महा दशा में शुम ग्रह से युक्त केतु की अन्तर्दशा हो तो कम सुख, कम लाम, निदित भोजन, पराया अन्न या श्रादघ भोजन का दर्योग, पापपूर्णं कार्यां से धन लाम होता है । दायेशाद्रिपुरन्धस्थे व्यये वा पापसंयुते ।।33।। राजकोपो धनच्छेदो बन्धनरोगपीडनम् । बलहानिः पितृद्धेषी भरातद्वेषो मनोरुजः ।।34।। महादशेश से 6.8.12 में पापयुक्त केतु हो तो राजकोप, धन की हानि, बन्धन, रोगपीडा, शक्ति की कमी, पिता से द्वेषमाव, माङ्यां से मनमुटाव व मनोविकार होते है ।
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