Effects like loss of wealth, antagonistic relations with kinsmen, obstacles in industrial ventures, pains in the body, danger from the members of the family etc., will be realised if Saturn be in the 6th, the 8th or the 12th from the lord of the Dasa (Jupiter) or be associated with a malefic.
दायेशात्केन्द्रकोणस्थे लाभे वा धनगेऽपि वा । भूलाभश्चार्थलाभश्च पुत्रलाभसुखं भवेत् ।।15।। गोमहिष्यादि लाभश्च शूद्रमूलादधनं तथा । दायेशाद् रिपुरन्धरस्थे व्यये वा पापसंयुते ।।16।। धनधान्यादि नाशश्च बन्धुमित्रविरोधकृत् । उद्योगभंगो देहार्तिं स्वजनानां महदभयम् ।।17।। () यदि बृहस्पति कौ दशा मं शनि की अन्तर्दशा हो तथा शनि दशापति गुरु से केन्द्र. त्रिकोण, लाम स्थान, धन स्थान मेहो तो भूमि का लाम, घन लाम, पुत्र प्राप्ति, पुत्र सुख, पशु धन का लाम, शूद्र से धन लाम होता है। () दशापति से 6.8.12 में शनि हो या पाप संयुक्त शनि हो तो धनधान्य का नाश, बन्धुओं व मित्रं से विरोध, प्रयत्नं की असफलता, शरीर कष्ट तथा अपने लोगं से विशेष भय होता है ।
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