Discord with kings and kinsmen, danger from thieves etc., death of parents, disgrace, punishment from government, loss of wealth, danger from snakes and poison, fever, losses in agricultural production, loss of lands etc., will be the results, if Jupiter be in his sign of debilitation, be combust, or be in the 6th, the 8th or the 12th from the Ascendant or be associated with or aspected by Saturn and Mars.
गुरु अन्तर्दशा फल :- बुधस्यान्तरगति जीवे लग्नात्केन्द्रत्रिकोणगे । स्वोच्चे वा स्वर्क्षगे वापि लाभे वा धनराशिगे ।।56।। देहसौख्यं धनावाप्ती राजप्रीतिस्तथैव च । विवाहोत्सव कार्याणि नित्यं मिष्ठान्नभोजनम् ।।57।। गोमहिष्यादि लाभश्च पुराणश्रवणादिकम् । देवतागुरुभक्तिश्च दानधर्ममखादिकम् ।।58।। यञ्चकर्मप्रवृदिधश्च शिवपूजा फलं तथा । यदि बुध की महादशा मं बृहस्पति की अन्तर्दशा हो तथा गुरु लग्न से कन्द्रया त्रिकोण मं या उच्वगत या स्वक्षेत्री या 2.11 भावम दहो तो शरीर का सुख, धनलाम, राजा से प्रेम,. विवाह आदि उत्सव कार्य, सदैव मधुर भोजन, गाय भैस आदि का लाम, पुराण श्रवण के योग, देवता व गुरु की भक्ति, दानधर्मं व यज्ञादि कार्य, शिव पूजा प्रतिष्ठा के अवसर प्राप्त होते हे । नीचे वास्तंगते वापि षष्ठाष्टव्ययराशिगे ।।59।। यदि गुरु नीचगत, अस्तंगत, 6.8.12 भावगत हो तो अशुम फल होते है।
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