Pressure of hard work as a government functionary, loss of position, fears, imprisonment, diseases, agony to self and kinsmen, heart disease, loss of reputation and wealth, will be the results if Rahu be associated with a malefic or malefics in the 8th or the 12th from the lord of the Dasa (Mercury).
दायेशाद् द्वादशे वापि ह्यष्टमे पापसंयुते । निष्ठुरं राजकार्याणि स्थानभ्रंशो महद्भयम् ।।52।। बन्धनं रोगपीडा च निजबन्धुमनोव्यथा । ददरोगो मानहानिश्च धनहानिर्भविष्यति ।।53।। दशापति से 8.12 भाव में पापयुक्त राहु हो तो कठोर राजकीय कार्य, स्थान का नाश या परिवर्तन, बहुत भय, बन्धन, रोग से पीडा, अपने लोगों कं कारण मन में व्यथा. हृदय रोग, मानहानि व धनहानि होती है । दितीयसप्तमस्थे वा च्यपमृत्युर्भविष्यति । तददोषपरिहारार्थ दुर्गालक्ष्मीजपं चरेत् ।।54।। श्वेतां गांम हिषीं दद्यात् ततः सौख्यमवाप्नुपात् ।।55।। यदि राहु 2.7 मावोँ मेँ हो तो अपमृत्यु होने का भय होता है । इस दोष को दूर करने के लिए दुर्गा व लक्ष्मी का पाठ जप अथवा महिषासुरमर्दिनी महालक्ष्मी रूप दुर्गा का पाठ (सप्तशती मध्यम चरित्र का नित्य पाठ) करना चाहिए । साथ ही दूधारू गाय मेस का दान करने से सुख मिलता हे ।
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.