There will be fear of premature death if Mars be the lord of the 2nd or the 7th from the Ascendant. The remedial measures to be adopted to obtain relief from the above evil effects are Mrityunjaya Japa and giving a cow in charity.
दायेशादथरन्ध्रस्थे व्यये वा पापसंयुते । तदभुक्त्यादौ महाक्लेशो भातवर्गे महदभयम् ।।43।। नृपाग्निचौरभीतिश्च पुत्रमित्रविरोधनम् । स्थानभ्रंशो भवेदादौ मध्ये सौख्यं धनागमः ।।44।। अन्ते तु राजभीतिः स्यात्स्थानभ्रंशो यथापि वा । दितीय द्यूननाथे तु द्यपमृत्युभयं भवेत् ।।45।। गोदानं प्रकुर्वीत मृत्युंजयजपं चरेत् । शंकरस्यप्रसादेन ततः सौख्यमवाप्नुयात् ।।46।। व बुध से 8.12 मे या पापयुक्त मंगल हो तो अन्तर्दशा के आरम्भ मं महान् क्लेश, भ्रात वर्ग मेँ भय, राजा आदि से पीडा, अग्नि चोर मय, पत्रों व मित्रों से विरोध, स्थान परिवर्तन, दशामध्य में सुख व॒ धन लाम, दशा के अन्त में राजमय, स्थानहानि होती हे । यदि मंगल 2.7 मावेश हो तो अपमृत्यु का मय होता है। दोष निवारण हेतु गोदान करं व मृत्युंजय जप कराए । तब शंकर जी की कूपा से सुख होता है ।
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