There will be physical distress if the Moon be in his sign of debilitation or in an enemy's sign. If the Moon be in kendra, trikona, the 3rd or the 11th from the lord of the Dasa (Mercury), there will be at the commencement of the Antardasa visits to sacred shrines, patience, enthusiasm and gains of wealth from foreign countries.
चन्द्रान्तर्दशा फल :- सौम्यस्यान्तग्ति चन्द्रे लग्नात्केन्द्र त्रिकोणगे । स्वोच्चे वा स्वर्क्षगे वापि गुरुदृष्टिसमन्विते ।।26।। योगस्थानाधिपत्येन योग प्राबल्यमादिशेत् । स्त्रीलाभं पुत्रलाभं च वस्त्रवाहनभूषणम् ।।27।। नूतनालयलाभं च नित्यं मिष्टान्न भोजनम् । गीतवाद्यप्रसंगे च शस्त्रविद्यापरिश्रमम् ।।28।। दक्षिणां दिशमाश्रित्य प्रयाणं च भविष्यति । द्वीपान्तराच्चवस्त्राणां लाभश्चैव भविष्यति ।।29।। मुक्ताविद्रुमरत्नानि धौतवस्त्रादिक लभेत् । बुध मेँ चन्द्र का अन्तर हो तथा चन्द्र, केन्द्रगत, त्रिकोणगत, उच्च स्वक्षेत्रगत, गुरु दृष्टयुत, योग कारक हो तो विशेष उत्तम फल, स्त्री लाभ, पुत्र लाम, वस्त्र वाहनादि का लाम, नया घर, सुन्दर मधुर मोजन, गानवाद्यादि आमोद-प्रमोद, शास्त्रों मे परिश्रम, दक्षिण दिशा की सफल यात्रा, विदेशी वस्त्रों की प्रापि, मोती माणिक्यादि का लाम, साफ घुले हए वस्त्रों का प्रयोगादि फल होता है। नीचारिक्ेत्रसंयुक्ते देहबाधा भविष्यति ।।30।। यदि नीच, शब्ु क्षेत्र में हो तो शरीर कष्ट होता है।
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