There will be fear of premature death if the Sun be the lord of the 2nd or the 7th (from the Ascendant). Worship of the Sun is the remedial measure to obtain relief from the above evil effects.
लग्नाष्टमव्यये वापि शन्यारफणिसंयुते । दायेशाद् रिपुरन्धस्थे व्यये वा बलवर्जिति ।।23।। चौराग्निशस्त्रपीडा च पित्ताधिक्यं भविष्यति । शिरोरुङ मनस्ताप इष्टबन्धु वियोगकृत् ।।24।। दवितीयसप्तमाधीशेद्यपमूत्युर्भविष्यति । तददोषपरिहारार्थ शान्तिं कुर्याद्यथाविधि ।।25।। लग्न या दशेश से 6.8.12 में सूर्य हो या सूर्यं शनि, मंगल, राहु से युक्त हो या निर्बल हो तो चोरपीडा, शस्त्रपीडा, अग्निपीडा, पित्तवृदिध, शिरोरोग, मनस्ताप, अपने प्रिय व्यक्ति का वियोग होता है। यदि सूर्य 2.7 भावेश हो तो अपमृत्यु होती है । इसकी शान्ति के लिए यथाविधि उपाय (सूर्य पूजा, आदित्य हृदय आदि) करना चाहिए ।
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