There will be physical distress if Ketu be the lord of the 2nd or the 7th (from the Ascendant). The remedial measure to obtain relief from the above evil effects, is giving a goat in charity.
दायेशाद्यदि रन्प्रस्थे व्यये वा पापसंयुते ।।9।। वाहनात्पतनं चैव पुत्रक्लेशादिसम्भवः । चौरादि राजभीतिश्च पापकर्मरतः सदा ।।10।। वृश्चिकादि विषाद् भीतिर्नीचिः कलहसम्भवः । शोकरोगादि दुःखं च नीचसंगादिकं भवेत् ।।11।। द्वितीय द्यूननाथेन सम्बन्धे देहबाधनम् । दोषस्यपरिहारार्थं छागदानं तु कारयेत् ।।12।। यदि महादशेश बुध से 8.12 भाव मे, पापयुक्त, कंतु हो तो वाहन से पतन, पुत्र क्लेश, चोरमय, राजमय, पापकर्म का उदय, विच्छ् आदि जीवां का मय, किसी भी प्रकार का विषेला संक्रमण, नीच लोगों से कलह, शोक, रोग, दुःख, नीच संगादि, फल होते है । यदि केतु 2.7 भाव या भावेशों से सम्बन्ध करे तो शरीर कष्ट होता है । इस दोष की शान्ति के लिए बकरे का दान करना चाहिए ।
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