Bṛhat Parāśara Horā Śāstra
Chapter 24 · atha bhāveśaphalādhyāyaḥ · अथ भावेशफलाध्यायः · Verse 98
Sanskrit · DevanāgarīBṛhat Parāśara Horā Śāstra manuscript tradition
भाग्येशे धनभावस्थे पण्डितो जनवल्लभः ।
जायते धनवान् कामी स्त्रीपुत्रादिसुखान्वितः
IAST Transliteration
bhāgyeśe dhanabhāvasthe paṇḍito janavallabhaḥ | jāyate dhanavān kāmī strīputrādisukhānvitaḥ
TranslationsTwo-source verified
English

If the 9th lord is in the 2nd, the native will be a scholar, be dear to all, wealthy, sensuous and endowed with happiness from wife, sons etc.

Hindi

नवमेश का द्वादशभाव-फल: (1) यदि नवमेश लग्न में हो तो मनुष्य भाग्यवान्‌, राजमान्य, सुशील, सौम्य व्यक्तित्व वाला, विद्यावान्‌ व जन-पूजित होता है। (2) भाग्येश द्वितीय में हो तो पण्डित, जन-प्रिय, धनवान्‌, कामी, स्त्री व पुत्रादि के सुख से युक्त होता है। (3) भाग्येश तृतीय स्थान में हो तो भाई के सुख से युक्त, धनवान्‌, पराक्रमी, रूप-गुण व शील से युक्त होता है। (4) भाग्येश चतुर्थ में हो तो मनुष्य घर व वाहन के सुख से युक्त, पुण्यवान्‌, वाक्-चतुर, यशस्वी, लोक-मान्य व साहसी होता है। (5) पञ्चमस्थ भाग्येश से भाग्यवान्‌, पुत्रवान्‌, गुरु-भक्ति में रत, मानी, धर्मात्मा, पण्डित व गुणवान्‌ होता है। (6) भाग्येश षष्ठ-भाव में हो तो कम-भाग्य वाला, मामा के सुख से रहित, शत्रु-पीडित होता है। (7) भाग्येश सप्तम भाव में हो तो स्त्री-सम्पर्क से भाग्योदय पाने वाला, गुणवान्‌, कीर्तिमान्‌, कामुक लेकिन कहीं-कहीं बाधित-सफलता वाला होता है। (8) अष्टमस्थ भाग्येश से मनुष्य भाग्यहीन होता है। बड़े भाई के सुख से रहित तथा भाग्य की लीलाओं से विशेष सन्तप्त होता है। (9) भाग्येश नवम में हो तो मनुष्य बहुत अधिक भाग्यशाली, गुणी-सुन्दर, भाइयों से युक्त होता है। (10) भाग्येश दशम में हो तो बलाबल के तारतम्य से सेनापति, मन्त्री या राजा होता है। अपि च गुणी एवं पूजनीय भी होता है। (11) भाग्येश एकादश स्थान में हो तो प्रतिदिन लाभ होता रहता है। वह गुरु-भक्त, स्नेहिल हृदय वाला, स्वाभिमानी, गुणी, पुण्य कमाने वाला होता है। (12) नवमेश द्वादश में हो तो भाग्य की हानि निश्चय से होती है। यदि द्वादश में नवमेश तुला में हो (वृश्चिक लग्न में द्वादशस्थ चन्द्र) तो विशेषतया भाग्यहीन होता है। ऐसे व्यक्ति का अधिक धन अतिथि-सत्कार में खर्च होता है।

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