If the 6th lord is in the 6th, the native will have enmity with the group of his kinsmen but be friendly to others and will enjoy mediocre happiness in matters like wealth.
षष्ठेश का द्वादशभाव-फल: (1) षष्ठेश लग्न में हो तो रोगी, ख्यातनामा, स्वयं अपनी हानि करने वाला, धनी, स्वाभिमानी, साहसी व गुणी होता है। (2) षष्ठेश द्वितीय में हो तो साहसी, अपने कुल में अग्रगण्य, परदेश में वास करने वाला, सुखी, उत्तम वक्ता, सदैव कार्यरत रहता है। (3) षष्ठेश तृतीय में हो तो मनुष्य क्रोधी, लाल आँखों वाला, लेकिन अप्रतापी, नौकरों को भी वश में न रख सकने वाला, भाई भी शत्रु के समान होता है। (4) षष्ठेश चतुर्थ में हो तो माता का सुख कम, स्वाभिमान की अधिकता, चुगलखोर, द्वेषभाव रखने वाला, चञ्चल मन वाला, अति-धनी होता है। (5) षष्ठेश पञ्चम में हो तो उसका धन चञ्चल होता है। वह दया-युक्त, सुखी, सौम्य स्वभाव वाला, अपने कार्य में अति-चतुर होता है। (6) षष्ठेश षष्ठ में हो तो अपने ही बन्धुओं से शत्रुता होती है। दूसरों से मैत्री-भाव, सुख मध्यम, धन व घमंड अधिक होता है। (7) षष्ठेश सप्तम में हो तो पुरुष को स्त्री का सुख कम होता है। लेकिन विख्यात, गुणी, मानी, साहसी व धनी होता है। (8) षष्ठेश यदि अष्टम में हो तो मनुष्य रोगी, विद्वानों का शत्रु, दूसरों के धन की कामना करने वाला, परस्त्री-लोलुप, अपवित्र होता है। (9) यदि षष्ठेश नवम में हो तो लकड़ी व पत्थर का व्यापार करने वाला, व्यापार में कहीं हानि व कहीं बहुत वृद्धि पाने वाला होता है। (10) षष्ठेश दशम में हो तो मनुष्य साहसी, कुल-प्रसिद्ध, पिता का विशेष आदर न करने वाला, अच्छा वक्ता व विदेश में सुखी होता है। (11) षष्ठेश एकादश में हो तो मनुष्य कीर्तिमान्, गुणवान्, मानवान्, साहसी, किन्तु पुत्र-सुख से रहित होता है। (12) द्वादशस्थ षष्ठेश से मनुष्य व्यसनी, हिंसक व आक्रामक स्वभाव वाला होता है। यदि शुभ-दृष्टि-युक्त हो तो सुखी व भोगी होता है।
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