Bṛhat Parāśara Horā Śāstra
Chapter 24 · atha bhāveśaphalādhyāyaḥ · अथ भावेशफलाध्यायः · Verse 55
Sanskrit · DevanāgarīBṛhat Parāśara Horā Śāstra manuscript tradition
सुतेशे सप्तमे मानी सर्वधर्मसमन्वितः ।
पुत्रादिसुखयुक्तश्च परोपकरणे रतः
IAST Transliteration
suteśe saptame mānī sarvadharmasamanvitaḥ | putrādisukhayuktaśca paropakaraṇe rataḥ
TranslationsTwo-source verified
English

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Hindi

पञ्चमेश का द्वादशभाव-फल: (1) पञ्चमेश लग्न में हो तो मनुष्य विद्वान्‌, पुत्रवान्‌, कुटिल, स्वार्थी होता है। सदैव धन-संग्रह में लगा रहता है। (2) पञ्चमेश द्वितीय में हो तो अनेक पुत्रों वाला, धनी, बड़े परिवार का पालन करने वाला, स्वाभिमानी, लोकप्रिय होता है। (3) पञ्चमेश तृतीय में हो तो मनुष्य भाई का प्यारा, मायावी, चुगलखोर, सदैव स्वार्थसिद्धि में लगा रहने वाला होता है। (4) पञ्चमेश चतुर्थ में हो तो लम्बे समय तक माता का सुख पाने वाला, धनी, लक्ष्मीयुक्त, सुबुद्धि, मन्त्री या गुरु होता है। (5) पञ्चम में पञ्चमेश रहने से कई पुत्र होते हैं। ऐसा व्यक्ति क्षण में रुष्ट व क्षण में तुष्ट, कठोर-भाषी, धार्मिक व बुद्धिमान्‌ होता है। (6) पञ्चमेश रिपु-भाव (षष्ठ) में हो तो पुत्र शत्रु के समान होता है, या मृत-पुत्र, या गोद-लिया पुत्र, अथवा पुत्र धन-रूप होता है। (7) यदि पञ्चमेश सप्तम भाव में हो तो मनुष्य स्वाभिमानी, धार्मिक विचारों वाला, धर्म-पालक, मजबूत शरीर वाला, सुपुत्रवान्‌, तेजस्वी व भक्तिमान्‌ होता है। (8) यदि पञ्चमेश अष्टम में हो तो पुत्र-सुख में अल्पता, खाँसी या श्वास-रोग, क्रोध, रासायनिक चिकित्सक (डॉक्टर) व धनी होता है। (9) यदि पञ्चमेश नवम में हो तो पुत्र राजा या राजतुल्य होता है। अथवा व्यक्ति स्वयं ग्रन्थकार तथा उसका पुत्र कुल-दीपक होता है। (10) पञ्चमेश दशम में हो तो मनुष्य को राजयोग व सन्तान-सुख होता है। वह अनेक सुख भोगने वाला, प्रसिद्ध होता है। (11) पञ्चमेश एकादश भाव में हो तो मनुष्य विद्वान्‌, लोकप्रिय, ग्रन्थकर्ता, अति-दक्ष एवं बहुत पुत्रों वाला व धनी होता है। (12) पञ्चमेश द्वादशस्थ हो तो मनुष्य को पुत्र या सन्तान का सुख नहीं होता है। यदि शुभ पञ्चमेश हो या शुभ-युक्त हो तो भक्तिमान्‌ व पुत्रवान्‌ होता है।

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