Bṛhat Parāśara Horā Śāstra
Chapter 24 · atha bhāveśaphalādhyāyaḥ · अथ भावेशफलाध्यायः · Verse 3
Sanskrit · DevanāgarīBṛhat Parāśara Horā Śāstra manuscript tradition
लग्नेशे सहजे जातः सिंहतुल्यपराक्रमी ।
सर्वसम्पद्युतो मानी द्विभार्यो मतिमान् सुखी
IAST Transliteration
lagneśe sahaje jātaḥ siṃhatulyaparākramī | sarvasampadyuto mānī dvibhāryo matimān sukhī
TranslationsTwo-source verified
English

If the lord of the ascendant is in the 3rd, the native will equal a lion in valour, be endowed with all kinds of wealth, be honourable, will have two wives, be intelligent and happy.

Hindi

लग्नेश का द्वादशभाव-फल: (1) लग्नेश लग्न में हो तो मनुष्य शरीर से सुखी, शुभ कार्यों में श्रम करने वाला, खुद्दार, स्वाभिमानी, चंचल विचार वाला, दो पत्नियों वाला, फिर भी परस्त्रीगामी होता है। (2) द्वितीय में लग्नेश रहने से जातक लाभ पाने वाला, विद्वान्, सुखी, सुशील, धर्मवेत्ता, मानयुक्त या स्वाभिमानी, अनेक स्त्रियों वाला व गुणी होता है। (3) तृतीयस्थ लग्नेश से सिंहवत् पराक्रमी, सब सम्पत्तियों से युक्त, अभिमानी, दो पत्नियों वाला, बुद्धिमान्‌ व सुखी होता है। (4) चतुर्थस्थ लग्नेश से माता-पिता के सुख से युक्त, अनेक भाइयों वाला, कामुक रूपवान्, गुणी होता है। (5) लग्नेश पञ्चम में हो तो मनुष्य को पुत्र का सुख मध्यम-सन्तोषजनक होता है, उसकी पहली सन्तान अल्पायु होती है तथा वह मानी, क्रोधी व राजमान्य होता है। (6) षष्ठस्थ लग्नेश से शरीर-सुख से रहित, पापयुक्त भी हो तो शत्रुओं से भय व पीडा होती है। यदि साथ में शुभ-ग्रह हो तो अशुभ फल कम होता है। (7) यदि लग्नेश सप्तम में हो तथा वह पापी ग्रह हो तो भार्या के लिए कष्टकारक है। यदि शुभ लग्नेश सप्तम में हो तो भ्रमणशील या प्रसिद्ध या विरक्त या राजा होता है। (8) अष्टम में लग्नेश हो तो मनुष्य की रुचि व कौशल सिद्ध-विद्या (तन्त्र-मन्त्र-जादूगरी अथवा गुप्त विद्या) में होता है। वह प्रायः रोगी या चोर या महा-क्रोधी या जुआरी या परस्त्रीगामी होता है। (9) नवम में लग्नेश हो तो मनुष्य भाग्यवान्, लोकप्रिय, विष्णुभक्त, पटु, वाग्मी, स्त्री-पुत्र-धन से युक्त होता है। (10) यदि लग्नेश दशम में हो तो मनुष्य प्रायः पिता के सुख (सहायता) से वंचित रहता है। वह राजमान्य, प्रसिद्ध, अनेक गुणों व स्त्री-सुख-युक्त होता है। (11) लग्नेश एकादश में हो तो मनुष्य सदा लाभ पाने वाला, सुशील, ख्यात-कीर्ति वाला, बहुत स्त्रियों व गुणों से युक्त होता है। (12) द्वादशस्थ लग्नेश से मनुष्य के शरीर-सुख में अल्पता, व्यर्थ खर्च करने वाला, क्रोधी स्वभाव होता है। यदि शुभ-ग्रह से युत हो तो उक्त फल नहीं होता।

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