SHORT LIFE: Should the 8th lord join the ascendant lord or a malefic and be in the 8th itself, the native will be short-lived.
दीर्घायु-योग: हे द्विजवर मैत्रेय! अब मैं (पराशर) आयु-भाव का फल कहता हूँ। यदि अष्टमेश केन्द्र में स्थित हो — तो दीर्घायु होती है। (पणफर में हो तो मध्यायु, आपोक्लिम में हो तो अल्पायु — यह इसी तर्क से स्वयं स्पष्ट है।) यदि अष्टमेश बहुत-से पाप-ग्रहों के साथ अष्ट्म में हो — तो अल्पायु होती है। यदि लग्नेश भी कई पाप-ग्रहों से युक्त होकर अष्ट्म में हो — तो भी यही योग होता है। इसी पद्धति से शनि से भी विचार करें, तथा दशमेश से भी विचार करना चाहिए — अर्थात् अष्टमेश, शनि व दशमेश केन्द्र में हो तो दीर्घायु, बहुत पाप-युक्त-दृष्ट हों तो अल्पायु, पणफर में हों तो मध्यायु, आपोक्लिम में हों तो अल्पायु होती है।
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